दांत टूटने, गिरने या किसी कारण से निकल जाने के बाद नकली दांत कैसे लगाए जाते हैं, यह सवाल बहुत से लोगों के मन में आता है। नकली दांत लगाने का तरीका हर व्यक्ति में एक जैसा नहीं होता। अगर एक दांत नहीं है, तो उसका इलाज अलग हो सकता है और अगर कई या सभी दांत नहीं हैं, तो इलाज का तरीका अलग हो सकता है।
नकली दांत लगाने के लिए मुख्य रूप से डेंचर, डेंटल ब्रिज और डेंटल इम्प्लांट (Dental Implant) जैसे विकल्प इस्तेमाल किए जाते हैं। डेंचर को निकाला जा सकता है, जबकि डेंटल ब्रिज और डेंटल इम्प्लांट से लगाए गए कई दांत मुंह में स्थायी रूप से लगाए जाते हैं। सही विकल्प दांतों, मसूड़ों, जबड़े की हड्डी और आपकी जरूरत की जांच के बाद चुना जाता है।
नकली दांत ऐसे कृत्रिम दांत होते हैं जिनका उपयोग टूटे, गिरे या गायब दांतों की जगह लेने के लिए किया जाता है। इन्हें आम भाषा में नकली दांत कहा जाता है।
नकली दांत कई प्रकार के हो सकते हैं:
इसलिए “नकली दांत” कोई एक ही प्रकार का इलाज नहीं है। मरीज की स्थिति के अनुसार अलग-अलग विकल्प उपलब्ध हो सकते हैं।
नकली दांत लगाने की प्रक्रिया सबसे पहले दांत और मसूड़ों की जांच से शुरू होती है।
डेंटिस्ट यह देखते हैं कि कितने दांत गायब हैं, आसपास के दांतों की स्थिति कैसी है, मसूड़ों में कोई बीमारी तो नहीं है और यदि डेंटल इम्प्लांट लगाना है तो जबड़े की हड्डी में पर्याप्त सहारा है या नहीं।
इसके बाद मरीज के लिए सही इलाज चुना जाता है।
आमतौर पर प्रक्रिया इस प्रकार हो सकती है:
डेंटल इम्प्लांट के मामले में जांच और इलाज की प्रक्रिया डेंचर या ब्रिज से अलग होती है।
डेंचर नकली दांत लगाने का सबसे सामान्य तरीका है। यह एक ऐसा कृत्रिम दांतों का सेट होता है जिसे मरीज जरूरत के अनुसार निकाल और लगा सकता है।
डेंचर मुख्य रूप से दो प्रकार के होते हैं।
जब ऊपर या नीचे के सभी प्राकृतिक दांत नहीं होते, तब पूरा डेंचर लगाया जा सकता है।
जब कुछ प्राकृतिक दांत मौजूद हों और कुछ दांत गायब हों, तब आंशिक डेंचर लगाया जा सकता है।
डेंचर बनाने के लिए डेंटिस्ट आपके मुंह और मसूड़ों का माप लेता है। इसके लिए पारंपरिक माप या कुछ मामलों में मुंह का स्कैन किया जा सकता है।
इस माप के आधार पर आपके मुंह के आकार के अनुसार डेंचर तैयार किया जाता है। इसके बाद डेंटिस्ट उसे मुंह में लगाकर उसकी फिटिंग और आराम की जांच करता है।
नया डेंचर लगाने के बाद उसे इस्तेमाल करने की आदत बनने में कुछ समय लग सकता है। शुरुआत में बोलने और खाना खाने में थोड़ी परेशानी हो सकती है, जो धीरे-धीरे कम हो सकती है।
अगर एक या कुछ दांत गायब हैं, तो कुछ मरीजों में डेंटल ब्रिज एक विकल्प हो सकता है।
डेंटल ब्रिज में गायब दांत की जगह कृत्रिम दांत लगाया जाता है और उसे आसपास के उपयुक्त दांतों के सहारे स्थिर किया जाता है। यह आमतौर पर मुंह में लगा रहता है और मरीज इसे खुद निकाल नहीं सकता।
डेंटल ब्रिज लगाने से पहले:
हर मरीज के लिए डेंटल ब्रिज सही नहीं होता। आसपास के दांतों की स्थिति, खाली जगह और काटने की स्थिति को देखकर इसका निर्णय लिया जाता है।
अगर आप फिक्स नकली दांत लगवाना चाहते हैं, तो कुछ मरीजों में डेंटल इम्प्लांट एक विकल्प हो सकता है।
डेंटल इम्प्लांट एक कृत्रिम जड़ की तरह काम करता है। इसे जबड़े की हड्डी में लगाया जाता है। इसके ऊपर बाद में कृत्रिम दांत, क्राउन या ब्रिज लगाया जा सकता है।
सबसे पहले डेंटिस्ट आपके दांत, मसूड़े, काटने की स्थिति और मुंह की सामान्य स्थिति की जांच करता है।
इम्प्लांट लगाने से पहले जबड़े की हड्डी और आसपास की संरचनाओं को देखने के लिए एक्स-रे किया जा सकता है। जरूरत होने पर 3D जांच भी की जाती है। इससे इम्प्लांट लगाने की योजना बनाने में मदद मिलती है।
डेंटल इम्प्लांट को जबड़े की हड्डी में लगाया जाता है। यह गायब दांत की जड़ की जगह सहारा देने का काम करता है। सामान्यतः यह प्रक्रिया स्थानीय सुन्न करने वाली दवा के साथ की जा सकती है।
इम्प्लांट लगाने के बाद उसे हड्डी के साथ जुड़ने और ठीक होने के लिए समय दिया जाता है। यह समय हर मरीज में अलग हो सकता है। कुछ मामलों में कई महीनों की उपचार अवधि लग सकती है।
उपचार के अगले चरण में इम्प्लांट के ऊपर क्राउन या ब्रिज लगाया जा सकता है। इस तरह गायब दांत की जगह नया दांत तैयार किया जाता है।
कई मामलों में डेंटल इम्प्लांट के ऊपर फिक्स क्राउन या फिक्स ब्रिज लगाया जाता है। ऐसे दांत मरीज खुद नहीं निकाल सकता।
हालांकि इम्प्लांट का उपयोग कुछ मामलों में ऐसे डेंचर को सहारा देने के लिए भी किया जा सकता है जिसे मरीज खुद निकाल सकता है। इसलिए हर इम्प्लांट उपचार में एक जैसा नकली दांत नहीं लगाया जाता।
अगर केवल एक दांत गायब है, तो इलाज के लिए कई विकल्प हो सकते हैं।
इनमें शामिल हैं:
अगर डेंटल इम्प्लांट उपयुक्त है, तो जबड़े की हड्डी में इम्प्लांट लगाकर उसके ऊपर क्राउन लगाया जा सकता है।
दूसरी ओर, डेंटल ब्रिज में आसपास के दांतों का सहारा लिया जाता है।
कौन सा इलाज सही है, यह डेंटिस्ट की जांच के बाद तय किया जाता है।
अगर कई दांत गायब हैं, तो इलाज आपकी स्थिति के अनुसार अलग हो सकता है।
डेंटिस्ट इन विकल्पों पर विचार कर सकता है:
अगर बहुत सारे या सभी दांत गायब हैं, तो पूरा डेंचर या उपयुक्त मरीजों में इम्प्लांट आधारित दांत लगाए जा सकते हैं।
अगर किसी व्यक्ति के ऊपर या नीचे के सभी दांत गायब हैं, तो पूरा डेंचर लगाया जा सकता है।
कुछ मरीजों में डेंटल इम्प्लांट की मदद से दांतों को अधिक सहारा देने की योजना भी बनाई जा सकती है। इम्प्लांट से एक या कई दांतों के साथ-साथ कुछ प्रकार के डेंचर को भी सहारा दिया जा सकता है।
लेकिन डेंटल इम्प्लांट हर व्यक्ति के लिए सही नहीं होता। इसके लिए जबड़े की हड्डी, मसूड़ों, बचे हुए दांतों और सामान्य स्वास्थ्य की जांच जरूरी होती है।
नहीं। डेंटल इम्प्लांट की सफलता के लिए सही जांच और उपचार योजना जरूरी होती है।
डेंटिस्ट आमतौर पर इन बातों को देखते हैं:
अगर इम्प्लांट लगाने वाली जगह पर हड्डी का सहारा कम है, तो कुछ मरीजों में हड्डी बढ़ाने की प्रक्रिया की जरूरत पड़ सकती है। यह सभी मरीजों में जरूरी नहीं होती।
नकली दांत लगाने में लगने वाला समय उपचार के प्रकार पर निर्भर करता है।
डेंचर और डेंटल ब्रिज की प्रक्रिया अलग होती है। डेंटल इम्प्लांट में इम्प्लांट लगाने के बाद हड्डी के साथ उसके जुड़ने के लिए अतिरिक्त समय लग सकता है। कुछ मामलों में उपचार कई महीनों तक चल सकता है।
इसलिए हर मरीज के लिए एक निश्चित समय बताना सही नहीं है।
गायब दांतों को बदलने से कई मरीजों को:
डेंटल इम्प्लांट से लगाए गए दांत कुछ मरीजों में चबाने, बोलने और दिखावट को बेहतर करने में मदद कर सकते हैं।
नकली दांत लगवाने के बाद उनकी सफाई और नियमित जांच जरूरी है।
डेंचर की सही सफाई न करने से मुंह में दर्द, संक्रमण और खाने या बोलने में परेशानी हो सकती है।
इम्प्लांट लगे दांतों की सफाई भी नियमित रूप से करनी चाहिए। आसपास मसूड़ों की सफाई रखना और समय-समय पर डेंटिस्ट से जांच करवाना जरूरी है।
| उपचार | कैसे लगाए जाते हैं? | क्या खुद निकाले जा सकते हैं? |
|---|
| पूरा डेंचर | मसूड़ों के ऊपर फिट किया जाता है | हाँ |
| आंशिक डेंचर | बचे हुए दांतों और मुंह के सहारे लगाया जाता है | हाँ |
| डेंटल ब्रिज | आसपास के दांतों के सहारे लगाया जाता है | आमतौर पर नहीं |
| डेंटल इम्प्लांट + क्राउन | जबड़े की हड्डी में लगाए गए इम्प्लांट के सहारे | नहीं |
| इम्प्लांट आधारित डेंचर | इम्प्लांट के सहारे डेंचर को स्थिर किया जाता है | कुछ प्रकारों में हाँ |
डेंचर, ब्रिज और डेंटल इम्प्लांट सभी गायब दांतों को बदलने के तरीके हैं, लेकिन इनकी प्रक्रिया और उपयोग अलग-अलग होते हैं।
इलाज शुरू करने से पहले इन सवालों के जवाब जरूर समझें:
डेंचर, ब्रिज और डेंटल इम्प्लांट में से कौन सा विकल्प आपके लिए उचित है, यह जांच के बाद पता चलता है।
इसके लिए हड्डी की स्थिति और मात्रा की जांच की जाती है।
कुछ मरीजों में अतिरिक्त हड्डी उपचार की जरूरत हो सकती है, जबकि कुछ में इसकी आवश्यकता नहीं होती।
डेंचर, ब्रिज और डेंटल इम्प्लांट की प्रक्रिया अलग-अलग होती है। खासकर इम्प्लांट उपचार में जांच, इम्प्लांट लगाने और अंतिम दांत लगाने के अलग चरण हो सकते हैं।
आपके लगाए गए नकली दांत के प्रकार के अनुसार डेंटिस्ट सफाई का सही तरीका बताएगा।
अगर आपका दांत गिर गया है, टूट गया है या लंबे समय से गायब है, तो दांतों की जांच करवाना उचित है।
खासकर अगर:
तो डेंटिस्ट से जांच करवाएं।
नकली दांत कैसे लगाए जाते हैं, इसका सही जवाब मरीज की स्थिति पर निर्भर करता है।
एक या कुछ दांत गायब होने पर डेंटल ब्रिज, आंशिक डेंचर या डेंटल इम्प्लांट जैसे विकल्प हो सकते हैं। सभी दांत गायब होने पर पूरा डेंचर या इम्प्लांट के सहारे लगाए गए दांत कुछ मरीजों के लिए विकल्प हो सकते हैं।
डेंटल इम्प्लांट में जबड़े की हड्डी में कृत्रिम जड़ जैसी संरचना लगाई जाती है। इसके ऊपर क्राउन, ब्रिज या कुछ प्रकार के डेंचर को सहारा दिया जा सकता है।
इसलिए नकली दांत लगवाने से पहले केवल कीमत या दांत दिखने में कैसे लगेंगे, यह देखना पर्याप्त नहीं है। दांत, मसूड़े, जबड़े की हड्डी और मुंह की पूरी स्थिति की जांच के बाद सही उपचार चुनना जरूरी है।
नकली दांत लगाने के लिए डेंचर, डेंटल ब्रिज और डेंटल इम्प्लांट जैसे विकल्प उपलब्ध हैं। कौन सा विकल्प सही है, यह दांतों और मसूड़ों की जांच के बाद तय किया जाता है।
हाँ। एक दांत गायब होने पर डेंटल इम्प्लांट और क्राउन, डेंटल ब्रिज या कुछ मामलों में आंशिक डेंचर का विकल्प हो सकता है।
हर नकली दांत निकालना जरूरी नहीं है। डेंचर को निकाला जा सकता है, जबकि डेंटल ब्रिज और कई इम्प्लांट आधारित फिक्स दांत मुंह में लगे रहते हैं।
कुछ मरीजों में कई या सभी गायब दांतों को डेंटल इम्प्लांट की मदद से बदला जा सकता है। इसके लिए जबड़े की हड्डी, मसूड़ों और सामान्य स्वास्थ्य की जांच जरूरी होती है।
समय उपचार के प्रकार और मरीज की स्थिति पर निर्भर करता है। डेंटल इम्प्लांट में हड्डी के साथ इम्प्लांट के जुड़ने के लिए अतिरिक्त समय लग सकता है।
आधुनिक कृत्रिम दांतों को दांतों के आकार, रंग और मुस्कान के अनुसार तैयार किया जा सकता है। अंतिम परिणाम चुने गए उपचार और मरीज की व्यक्तिगत स्थिति पर निर्भर करता है।
डेंटिस्ट दांतों और मसूड़ों की जांच करता है। डेंटल इम्प्लांट के लिए एक्स-रे और जरूरत के अनुसार 3D जांच से जबड़े की हड्डी और आसपास की संरचनाओं का मूल्यांकन किया जा सकता है।