जब रात के समय अचानक अक्ल दाढ़ का दर्द शुरू होता है, तो वह पल बेहद तकलीफदेह होता है। आप न ठीक से सो पाते हैं, न कुछ खा पाते हैं, और कान से लेकर सिर तक झनझनाहट महसूस होने लगती है।
अचानक उठने वाला यह दर्द किसी को भी परेशान कर सकता है। ऐसे में सही जानकारी और सही इलाज ही आपको इस समस्या से बाहर निकाल सकता है।
इस लेख में हम आपको अक्ल दाढ़ के बारे में विस्तार से बताएंगे। हम जानेंगे कि यह दर्द क्यों होता है, इससे तुरंत राहत कैसे पाएं, और अगर सर्जरी की नौबत आए, तो उसकी पूरी प्रक्रिया क्या है।
दांतों के एकदम पिछले हिस्से में होने वाला दर्द अक्सर बहुत तेज और असहनीय होता है। जब विजडम टूथ (wisdom tooth) मसूड़ों को फाड़कर बाहर आने की कोशिश करता है, तो वहां सूजन और तेज दर्द होने लगता है।
कई बार मसूड़ों के अंदर जगह नहीं होती, जिससे दांत टेढ़ा निकलने लगता है। यह आसपास के दांतों पर दबाव डालता है। अगर आप डेंटिस्ट (Dentist) के पास जाएं, तो वे अक्सर बताते हैं कि जगह की कमी ही इस गंभीर दर्द का मुख्य कारण है।
अक्ल दाढ़ हमारे मुंह के सबसे आखिरी दांत होते हैं। इन्हें मेडिकल भाषा में थर्ड मोलर (Third Molar) कहा जाता है।
आमतौर पर ये दांत 17 से 25 साल की उम्र के बीच निकलते हैं। कुछ लोगों में यह बिना किसी परेशानी के बाहर आ जाते हैं, लेकिन ज्यादातर लोगों के लिए यह एक दर्दनाक अनुभव साबित होता है।
चूंकि यह दांत सबसे अंत में आते हैं, इसलिए कई बार हमारे जबड़े में इनके लिए पर्याप्त जगह नहीं बची होती।
अक्ल दाढ़ दर्द के पीछे कई मुख्य कारण हो सकते हैं:
अक्ल दाढ़ के मसूड़ों में फंसे रहने की स्थिति को इम्पैक्टेड टूथ (Impacted Tooth) कहा जाता है। यह मुख्य रूप से चार प्रकार का होता है:
इसमें दांत आगे की तरफ (मुंह के सामने वाले हिस्से की ओर) झुका होता है। यह सबसे आम प्रकार है।
इसमें दांत पीछे की तरफ (गले की ओर) झुका होता है। इसे निकालना सबसे मुश्किल माना जाता है।
इसमें दांत बिल्कुल सीधा होता है, लेकिन मसूड़े के अंदर ही फंसा रह जाता है।
यह स्थिति सबसे दर्दनाक होती है। दांत पूरी तरह लेटा हुआ होता है और आगे वाले दांत की जड़ों को नुकसान पहुंचाता है।
अगर आपको नीचे दिए गए लक्षण महसूस हो रहे हैं, तो इसका मतलब है कि आपकी अक्ल दाढ़ गंभीर समस्या पैदा कर रही है:
रात के समय या जब डॉक्टर के पास जाना संभव न हो, तो आप इन स्टेप-बाय-स्टेप घरेलू उपायों को अपना सकते हैं। इससे आपको सीवियर टूथ पेन (severe tooth pain) से कुछ राहत मिलेगी।
एक गिलास हल्का गर्म पानी लें। उसमें आधा चम्मच नमक मिलाएं। इस पानी से दिन में 4-5 बार अच्छी तरह कुल्ला करें। यह सूजन और बैक्टीरिया को कम करता है।
लौंग में प्राकृतिक सुन्न करने वाले गुण होते हैं। एक कॉटन बॉल पर थोड़ा सा लौंग का तेल लगाएं और दर्द वाली जगह पर रखें। इससे दर्द में तुरंत कमी आती है।
एक तौलिए में बर्फ के कुछ टुकड़े लपेटें। इसे गाल के बाहर उस जगह पर लगाएं जहां दर्द है। 15 मिनट तक सिकाई करें। इससे सूजन कम होगी।
लहसुन में एंटी-बैक्टीरियल गुण होते हैं। एक लहसुन की कली को पीसकर उसमें थोड़ा नमक मिलाएं और दर्द वाली जगह पर लगाएं।
घरेलू उपाय केवल कुछ समय के लिए आराम दे सकते हैं। अगर दर्द तीन दिन से ज्यादा बना रहे, तो आपको तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए।
बुखार आना, जबड़े में तेज सूजन, या सांस लेने और निगलने में परेशानी होना खतरे के संकेत हैं। ऐसे लक्षणों को नजरअंदाज न करें और तुरंत एक अच्छे डेंटल क्लिनिक में संपर्क करें।
जब आप डेंटिस्ट के पास जाते हैं, तो वे सबसे पहले आपके मुंह की शारीरिक जांच करते हैं। इसके बाद समस्या की गहराई समझने के लिए डेंटल एक्स-रे (Dental X-ray) किया जाता है।
एक्स-रे की मदद से डॉक्टर यह देखते हैं कि दांत मसूड़े के अंदर किस स्थिति में है। क्या वह सीधा है, तिरछा है, या आगे वाले दांत की जड़ों को नुकसान पहुंचा रहा है। इसी जांच के आधार पर आगे का इलाज तय किया जाता है।
अगर दांत सीधा निकल रहा है लेकिन मसूड़ों में इन्फेक्शन है, तो डॉक्टर तुरंत दांत नहीं निकालते। वे पहले आपको कुछ दवाइयां देते हैं:
ध्यान रहे कि यह दवाइयां समस्या का स्थायी समाधान नहीं हैं। इन्फेक्शन खत्म होने के बाद डॉक्टर दांत निकालने की सलाह दे सकते हैं।
हर किसी को अक्ल दाढ़ निकालने की जरूरत नहीं होती। अगर दांत बिल्कुल सीधा है और उसे साफ करना आसान है, तो आप उसे रख सकते हैं।
लेकिन, अगर दांत इम्पैक्टेड है, आसपास के दांतों को खराब कर रहा है, या बार-बार इन्फेक्शन का कारण बन रहा है, तो दांत को निकालना (Tooth Extraction) ही सबसे सही फैसला होता है। अगर आप इसे इग्नोर करते हैं, तो आगे चलकर जबड़े में सिस्ट (Cyst) बन सकता है जो हड्डियों को गला सकता है।
अगर दांत मसूड़े या हड्डी के अंदर फंसा है, तो छोटी सर्जरी करनी पड़ती है। यह प्रक्रिया इस प्रकार होती है:
सबसे पहले डॉक्टर उस जगह को पूरी तरह सुन्न कर देते हैं। इससे आपको पूरी प्रक्रिया के दौरान कोई दर्द महसूस नहीं होता।
अगर दांत मसूड़े के नीचे है, तो डॉक्टर मसूड़े में एक छोटा सा कट लगाते हैं ताकि दांत तक पहुंचा जा सके।
कई बार दांत को पूरा निकालना मुश्किल होता है। ऐसे में डॉक्टर दांत को छोटे-छोटे टुकड़ों में तोड़कर निकालते हैं।
दांत निकालने के बाद उस जगह को साफ करके वहां टांके (Stitches) लगा दिए जाते हैं, ताकि घाव जल्दी भर सके। ये टांके आमतौर पर खुद घुलने वाले होते हैं।
अक्ल दाढ़ निकालने के बाद रिकवरी में 3 से 7 दिन का समय लग सकता है। जल्दी ठीक होने के लिए इन बातों का ध्यान रखें:
किसी भी सर्जरी की तरह इसमें भी कुछ जोखिम हो सकते हैं। सबसे आम समस्या ‘ड्राई सॉकेट’ (Dry Socket) की होती है। यह तब होता है जब दांत निकालने वाली जगह से खून का थक्का हट जाता है। यह बेहद दर्दनाक होता है।
इससे बचने के लिए सर्जरी के बाद धूम्रपान न करें, थूकें नहीं, और डॉक्टर द्वारा दी गई हिदायतों का सख्ती से पालन करें। बहुत ही दुर्लभ मामलों में आसपास की नसों को नुकसान पहुंच सकता है, जिससे जीभ या होठों में कुछ समय के लिए सुन्नपन आ सकता है।
अगर आप सोच रहे हैं कि अक्ल दाढ़ निकालने का खर्च कितना होता है, तो यह कई बातों पर निर्भर करता है।
मेट्रो शहरों (जैसे दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु) में एक सामान्य इम्पैक्टेड विजडम टूथ की सर्जरी का खर्च 3000 रुपये से लेकर 8000 रुपये तक हो सकता है। वहीं, छोटे शहरों में यह खर्च 1500 रुपये से 4000 रुपये के बीच आ सकता है।
दांत की जटिलता, सर्जन का अनुभव और क्लिनिक की सुविधाएं इस खर्च को प्रभावित करती हैं।
दांतों की किसी भी समस्या से बचने का सबसे अच्छा तरीका है सही ओरल हाइजीन (Oral Hygiene) बनाए रखना।
दिन में दो बार ब्रश करें, फ्लॉस का इस्तेमाल करें और एंटी-बैक्टीरियल माउथवॉश से कुल्ला करें। अपने डेंटिस्ट के पास हर छह महीने में रेगुलर चेकअप के लिए जाएं। अगर आप सही टूथब्रश और टूथपेस्ट का इस्तेमाल करते हैं, तो मसूड़ों की सेहत लंबे समय तक अच्छी बनी रहती है। आप अपने डेंटिस्ट से एक अच्छी क्वालिटी के डेंटल केयर किट की मांग कर सकते हैं, जो आपकी ओरल हेल्थ को मजबूत बनाए रखने में मदद करेगा।
नहीं। अगर दांत तिरछा है या जगह की कमी है, तो दर्द अपने आप पूरी तरह खत्म नहीं होगा। घरेलू उपाय सिर्फ अस्थायी आराम देते हैं। आपको डेंटिस्ट की सलाह लेनी ही चाहिए।
सर्जरी के दौरान आपको लोकल एनेस्थीसिया दिया जाता है, इसलिए कोई दर्द नहीं होता। आप सिर्फ दबाव महसूस करते हैं। सर्जरी के बाद होने वाले दर्द को कंट्रोल करने के लिए डॉक्टर दवाइयां देते हैं।
ज्यादातर लोग 3 से 4 दिन में सामान्य महसूस करने लगते हैं। पूरी तरह से घाव भरने में एक से दो हफ्ते का समय लग सकता है।
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